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महादेवी वर्मा के कविता संबंधी विचार : परिक्रमा से उद्घृत

साहित्य की अनेक प्राचीन- नवीन विधाओं में कविता ही ऐसी विधा  है, जिसके अनेक और वादों की कभी न समाप्त होने वाली श्रृंखला बनती रही है। प्रत्येक युग में इसमें कहाँ जुड़ जाती है, दूटती नहीं। आधुनिक युग के सात दशकों में कविता के तत्व तथा शिल्प को लेकर जितने अधिक आयोजन हुए हैं, वे …

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निबंध की परिभाषा एवं प्रकार

निबंध शब्द रूप शुद्ध भारतीय है निबन्ध्नातीति निबंधः के आधार पर इस शब्द का अर्थ ग्रहण किया जाता था । प्राचीन काल में पोथियों  को सिल कर रखने की प्रथा थी । उसे निबंध कहा गया . किंतु आधुनिक संदर्भ में निबंध का अर्थ संकोच खो गया है और यह एक विधा विशेष के रूप में प्रचलित है.  आज यह अंग्रेजी के Essay का पर्याय …

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श्रमिकों को भगवान लिखूँगा: डॉ. सतीश कुमार श्रीवास्तव ‘नैतिक’ चेन्नई

 डॉ. सतीश कुमार श्रीवास्तव युवा कवि के रूप में खासी ख्याति अर्जित कर चुके हैं , आपके दो काव्य संग्रह चलो  आदमी बना जाये और दर्द का व्याकरण प्रकाशित हो चुका है . आमियत के खोते हुए ज़माने में आदमी होने की ललक आपकी रचानाओं सर्वत्र देखने को मिलती है . सतीश  एक जीवठ एवं …

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मेरी दो कविताएँ

तहखाना   एक तहखाना है,  मेरे मन में  जिसमें दफनाया है मैंने  अपने बहुत से ज्जबात और, बहुत सी अपनी  और अपनी दुनिया में आये लोगों की  कही अनकही बातों को  उसी तहखाने में दफन हैं  मेरी बहुत सी छोटी-बडी ख्वाहिशें,  जो हमेशा मेरे मन में उठतीं गिरतीं रहतीं हैं  ठीक उसी तरह जैसे समन्दर में  …

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भाषा का सामान्य परिचय(General Introduction to Language)

भाषा का सामान्य परिचय-(General Introduction to Language)- मानव एक सामाजिक प्राणी है। वह मिलनसार प्रवृत्ति का प्राणी है और एक दूसरे से आसानी से घुलमिल जाता है। वह भाषा के माध्यम से अपनी भावनाओं, अनुभूतियों एवं विचारों का एक दूसरे के साथ आदान-प्रदान करता है। ऐसा कर मनुष्य एक दूसरे के साथ सम्बन्ध निर्मित करते …

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निबंधकार अज्ञेय

    अज्ञेय आधुनिक हिंदी साहित्य के अत्यंत विशिष्ट लेखक रहे हैं। वह आधुनिक दृष्टि और अनुभव से संपन्न एक विचारक, कवि के रूप में सर्वमान्य हैं ।अज्ञेय  को नई कविता का शालाका पुरुष कहा जाता है। कविता ,उपन्यास ,कहानी के अतिरिक्त अज्ञेय ने अनेक महत्वपूर्ण निबंधों की भी रचना की है। इनके निबंध को तीन भागों में विभक्त किया …

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ऋषभदेव घिमिरे की कविता

परिचय -ऋषभदेव घिमिरे ,महासचिव  अन्तर्राष्ट्रीय नेपाली साहित्य समाज,नेपाल च्याप्टर कविता का युग मैं व्यस्त शहरका एक मुसाफिर वक्त ने सहि किया या बुरा मैने नहि टोका समयको कुछ सपने थे कुछ पुकारा था वक्त ने कह दिया अौर पुकार करो कुछ सयम वाद पुरे होंगेँ सपनोकी ख्वाहिस बहुत व्यस्त हूँ मै किसिको पता नही कभी …

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मुक्तिबोध की काव्यगत विशेषताएं

मुक्तिबोध मूलतः कवि हैं. तार सप्तक के प्रकाशन से मुक्तिबोध साहित्य के व्यापक धरातल पर उदित हुए. तार सप्तक में प्रकाशित उनकी कविताएँ हैं – आत्मा के मित्र मेरे, दूरतार , खोल आंखें, अशक्त, मेरे अंतर, मृत्यु और कवि, पूंजीवादी समाज के प्रति, नाश देवता, सृजन क्षण, अंतदर्शन, आत्म संवाद, व्यक्ति और खण्डहर, मैं उनका …

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हिन्दी व्याकरण

व्याकरण – व्याकरण वह विद्या है ,जिससे हमें ठीक-ठीक बोलने ,लिखने और सीखने का ज्ञान हो जाता है . भाषा को सीखने और समझने के साथ-साथ भाषा का सम्यक बोध व्याकरण के द्वारा ही संभव है. व्याकरण के अन्तर्गत वर्ण व्यवस्था से लेकर भाषा व्यवस्था पर विचार किया जाता है. भाषा की सबसे छोटी इकाई …

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दादा साहेब फाल्के: हिन्दी सिनेमा के शिल्पकार :प्रो. पुनीत बिसारिया

अध्यक्ष हिन्दी विभागबुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय, झांसीअध्यक्ष ,भारतीय राष्ट्रवादी फिल्म एवं टेलीविजन संस्थान , संयोजक, हिन्दी पाठ्यक्रम एवं ई कन्टेन्ट निर्मात्री समितिउत्तर प्रदेश सरकार  भारत के अमूल्य रत्न दादा साहब फाल्के का आज 152 वाँ जन्मदिवस है। उनका जन्म 30 अप्रैल, 1870 को नासिक के निकट ‘त्र्यंबकेश्वर’ में हुआ था। उनके पिता संस्कृत के प्रकाण्ड पंडित और मुम्बई …

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